आसान तरीके से जानिये कॉल सेंटर/बीपीओ के इंटरव्यू के बारे में पूरी जानकारी

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जैसा कि आपको बता दें कि बीपीओ का पूरा नाम “बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्स है. कॉल सेंटर/बीपीओ को अगर हम साधारण भाषा में कहें तो यह एक प्रकार की आउटसोर्सिंग है जिसमें एक तृतीय पक्ष की सेवा प्रदाता को मैनेज और एक विशिष्ट व्यवसाय की जिम्मेदारियां दे डी जाती है.

इंटरव्यू के राउंड

इसमें बात करेंगे कॉल सेंटर/बीपीओ के वोइस और नॉन वोइस प्रोसेस के अलग-अलग इंटरव्यू राउंड के बारे में:

आप नीचे दिए गए सेक्शन पर क्लिक करके अपना टॉपिक पढ़ सकते है

कॉल सेंटर/बीपीओ के इंटरव्यू राउंड का पूरा प्रोसेस

कॉल सेंटर/बीपीओ में सेलेक्शन होना ज्यादा कठिन नहीं होता है अगर आप अच्छे से तैयारी करते है तो.

  1. टेलीफोनिक इंटरव्यू
  2. जनरल एप्टीट्युड टाइम
  3. सामूहिक बातचीत
  4. कम्यूटर प्रोफिएंसी टेस्ट
  5. अंतिम पर्सनल इंटरव्यू (HR)

कॉल सेंटर/बीपीओ इंटरव्यू के नॉन वोइस के लिए राउंड और प्रोसेस

वोइस और नॉन वोइस प्रोसेस के इंटरव्यू में थोड़ा ही अंतर होता है. जैसे वोइस प्रोसेस में कम्युनिकेशन स्किल्स पर ज्यादा फोकस होता है, उसी तरह नॉन वोइस प्रोसेस में भी राइटिंग स्किल पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है क्योंकि जो भी इसमें क्लाइंट के इंटरेकशन मेल के जरिये होता है. इसमें एक और बात जो महत्वपूर्ण है और वो है हर राउंड को क्लियर करना होगा नहीं तो आपको पूरे इंटरव्यू से बाहर कर दिया जाता है.

  1. लिखित टेस्ट
  2. टाइपिंग स्पीड का टेस्ट
  3. जनरल एप्टीट्युड टेस्ट 
  4. अंतिम पर्सनल इंटरव्यू (HR)

वोइस-प्रोसेस के इंटरव्यू के लिए राउंड की पूरी जानकारी

  1. टेलीफोनिक इंटरव्यू.

टेलीफोनिक इंटरव्यू के दौरान रिक्रूटर दो चीजें देखते है:

  • उच्चारण (Accent)
  • अपने क्षेत्र में नॉलेज (Field Knowledge)

उच्चारण

सही और अच्छा उच्चारण किसी भी रिक्रूटर के लिए सामान्य जरूरतें होती है क्योंकि आप वोइस प्रोसे के लिए इंटरव्यू दे रहे है. इसमें वो आपसे कोई भी जनरल सवाल पूछ सकते है या फिर कुछ वर्ड की लिस्ट भी दे सकते है जो अआपो बोलने होंगे. इससे रिक्रूटर बस आपकी भाषा देखना चाहते है कि आप किस तरह बोलते है या सही बोल पाते है या नहीं.

  1. आपने सुबह नाश्ते में क्या खाया ? 
  2. अपने बारे में कुछ बताएं.
  3. किसी भी विषय पर 2 से 3 मिनट तक बताएं.
  4. अपने रोजमर्रा का टाइम बताएं.

यह सब प्रश्न सुनकर हो सकता है आपको थोड़ा अजीब लगा हो, लेकिन इनको पूछने के पीछे का कारण बहुत ही साधारण है. रिक्रूटर सिर्फ यह देखना चाहते है कि आप कितनी आसानी से और बिना रुके अटके बोल पाते है. वो आपका कॉन्फीडेंस, कम्युनिकेशन स्किल और भाषा पर आपकी कमांड देखना चाहते है, इसलिए ज्यादा परेशान हुए बिना जवाब दें.

प्रश्न के अलावा रिक्रूटर आपको शब्दों की एक लिस्ट भी दे सकते है जिस में आपके उच्चारण को देखा जाता है.

  • Crisps (क्रिस्प्स)
  • Should (शुड)
  • Would (वुड)
  • Order (ऑर्डर)
  • Murder (मर्डर)
  • Air (एयर)
  • Literature (लिटरेचर)
  • Language (लैंग्वेज)
  • Alter (आल्टर)
  • Law (लॉ)
  • Low (लौ)
  • Development (डेवलपमेंट)
  • Decision (डिसिशन)
  • Gorgeous (गॉर्जियस)
  • Thoroughly (थोरोली)
  • Enhance (एनहान्स)
  • Influence (इन्फ्लुएंस)
  • Affect (एफेक्ट)
  • Effect (इफ़ेक्ट)
  • Adjective (एडजेक्टिव)
  • Island (आइलैंड)
  • Cough (कफ)
  • Though (थौ)
  • Through (थ्रू)
  • Vocabulary (वोकैबुलरी)
  • Psychologist (साइकोलोजिस्ट)
Word ki pronunciation sune

फील्ड में नॉलेज

उच्चारण (Accent) की तरह ये भी बहुत महत्वपूर्णहै और इसके पीछे का कारण सिर्फ यह देखना चाहते है कि आपको कॉल सेंटर/बीपीओ के सामान्य नियमों के बारे में जानकारी है या नहीं. नीचे कुछ सामान्य और आपकी फील्ड के अनुसार सवाल पूछे जाते है:

(i) बीपीओ और कॉल सेंटर में क्या अंतर होता है ?

बीपीओ जिसे हम “बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग की कह सकते है में थर्ड पार्टी ओर्गनाइजेशन के जरिये लोगों के बैकएंड चीजों को करने के लिए हायर किया जाता है. कॉल सेंटर में बिजनेस क्लाइंट के साथ वोइस के जरिये डील करने में काम आता है.

(ii) बीपीओ की अलग-अलग कैटेगरी बताएं और आप किस में काम करना पसंद करेंगे ?

बीपीओ को बिजनेस डिविजन के अनुसार कैटगरी किया जा सकता है. इंटरव्यूवी अपने इंटरेस्ट के अनुसार काम करने के लिए डिविजन चयन कर सकते है.

  • एडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट (Administrative Department)
  • पर्चेस डिपार्टमेंट (Purchase Department)
  • सेलिंग डिपार्टमेंट (Selling Department)
  • कॉल सेंटर (Call Center)
  • बैक ऑफिस (Back Office)
(iii) वोइस बीपीओ और नॉन वोइस बीपीओ में से किसका फ्यूचर ज्यादा अच्छा है ?

वोइस बीपीओ में कर्मचारी क्लाइंट के साथ सीधे वोइस कॉल के जरिये डील करता है और नॉन वोइस बीपीओ में क्लाइंट के साथ मेल या डॉक्यूमेंट के द्वारा इंटेरेकशन होता है.

इस प्रश्न का उत्तर आप अपने रूचि के अनुसार दें क्योंकि कुछ लोगों की सोशल स्किल अच्छी हो सकती है तो कुछ की डाक्यूमेंट्स लिखने में.

2) जनरल एप्टीट्युड टेस्ट

कॉल सेंटर/बीपीओ के लिए बहुत ही सरल तरीके से एप्टीट्युड टेस्ट लिया जाता है. इस टेस्ट के लिए कैंडिडेट्स को 30 मिनट का समय दिया जाता है. इस प्रोसेस में कैंडिडेट्स को उसकी जनरल एनालिटिकल एबिलिटी, अंग्रेजी में वोकाबुलरी और लोजिकल एबिलिटी के लिए टेस्ट किया जाता है. इंटरनेट पर प्रैक्टिस के लिए बहुत सारे प्रश्न और उसके उत्तर भी उपलब्ध है जिससे आप तैयारी कर सकते है. इस राउंड को क्लियर करने के लिए लगभग 60% स्कोर होना जरूरी होता है.

3) सामूहिक वार्ता

सामूहिक वार्ता जिसे हम अंग्रेजी में (Group discussions) कहते है. इसमें मुख्य रूप से बोलने की क्षमता पर ध्यान दिया जाता है. साथ ही देखने के लिए आप वास्तविक दुनिया के मुद्दे से कैसे डील करते है और आपके विचार क्या है दुनिया में जो चीजें हो रही पर. इसलिए ध्यान रखें कि इंटरव्यू में जानें से पहले सारे वर्तमान में घटी घटनाओं के बारे में पढ़कर और तैयार होकर जाना चाहिए  

4) कम्यूटर प्रोफिएंसी टेस्ट

यह टेस्ट कैंडिडेट्स के सामान्य ज्ञान और टाइपिंग स्पीड को देखने के लिए लिया जाता है. इस राउंड को क्लियर करना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि आपका बहुत सारा काम कम्यूटर पर ही निर्भर करेगा, और अगर आप इस टेस्ट को पास नहीं कर पाते है तो फिर जॉब मिलने की उम्मीद ही छोड़ सकते है. इसलिए इंटरव्यू देने जाने से पहले आप माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के सामान्य और फंडमेंटल के बारे में अच्छे से पढ़कर तैयारी कर लें.

5) फाइनल पर्सनल इंटरव्यू (HR)

(i) अपने बारे में कुछ बताएं.

यह सबसे पहला प्रश्न होता है जो इंटरव्यूवर बात करने के लिए पूछता है कि आप अपने बारे में कुछ बताएं. इसके बाद जवाब में आपको अपना नाम, शैक्षिक योग्यता, अनुभव, मजबूतियों और कमजोरियों के बारे में बताना होता है.

अगर आप अनुभवी है तो कुछ इस तरह से जवाब दे सकते है – मैं बीपीओ इंडस्ट्री में पिछले कई सालों से काम कर रहा/रही हूँ. मैंने इससे पहले __ कम्पनी में काम किया है. मुझे यह जॉब इसलिए पसंद है क्योंकि मुझे नए लोगों से बात करना अच्छा लगता है और अब मैं चैलेंजिंग पोजीशन ढूढ़ रहा/रही हूँ जहाँ पर मैं अपनी स्किल को और अच्छे से अप्लाई कर सकूं और लोगों से नई-नई बातें सीखूं.

लेकिन अगर आप नए-नए अर्थात फ्रेशर है तो अपने कॉलेज की क्रियाकलापों के बारे में बता सकते है या आपकी कोई भी खूबी जिससे आपकी कम्युनिकेशन स्किल के बारे में पता चल सके. साथ में यह भी बताएं कि आपको लोगों से बात करना कितना पसंद है और कितना आसान.

(ii) आप बीपीओ के बारे में क्या जानते है ?

यह प्रश्न ज्यादातर फ्रेशर से पूछा जाता है. इसका जवाब आप शुरुआत कर सकते है कि बीपीओ का मतलब होता है बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग. इसका मतलब यह है कि एक बिजनेस अपने कुछ फंक्शन या प्रोसेस किसी और कंपनी को  आउटसोर्स कर रहा है जो उन कामों को करने में ज्यादा अच्छा रहता है. ज्यादातर फंक्शन जैसे बैक ऑफिस प्रोसेसिंग, कस्टमर सपोर्ट, टेक्निकल सपोर्ट किये जाते है. फिर बोलें कि 2 तरह के बीपीओ होते है जिसमें एक घरेलू और दूसरा अंतर्राष्ट्रीय.

(iii) आप कॉल सेंटर/बीपीओ में क्यों काम करना चाहते है ?

यह सवाल उन लोगों से पूछा जाता है जिन्होंने या तो मास्टर की डिग्री की पढ़ाई की हो या फिर जिनके पास इंजीनियरिंग, अंग्रेजी होनर्स जैसी कोई डिग्री की हुई हो. इंटरव्यूवर या रिक्रूटर को लगता है कि आप बीपीओ की जॉब के लिए योग्य है या नहीं. इसलिए इस सवाल के जवाब में आप ख़ास ध्यान दें कि आप बीपीओ इंडस्ट्री के एडवांटेज के बारे में बात करें – कि कैसे आप कम्युनिकेशन स्किल, पर्सनल्टी को अच्छा चाहते है, साथ ही इसमें इस तेजी से बढ़ती हुई इंडस्ट्री का हिस्सा बनकर सैलरी और बाक़ी इंटेंसिव को इंजॉय करना चाहते है. 

(iv) हम आपको इस कंपनी में क्यों रखें ?

इस सवाल के जवाब में आप अपनी खूबियों के बारे में बताकर इंटरव्यूवर को दिखा सकते है कि आप जॉब के लिए एकदम फिट है. जॉब की जरूरतों के अनुसार अपनी क्वालिटी को बता सकते है. उदाहरण के लिए अगर कॉलिंग प्रोफाइल है अलग शिफ्ट के टाइम के साथ तो आप जवाब में बोलें कि आपकी कम्युनिकेशन स्किल बहुत अच्छी है और साथ में यह भी कह सकते है कि आपको रात में काम करने में कोई दिक्कत नहीं है. अगर ऐसी जॉब है जिसमें आपको एक दिए गए समय में काम करना होता है तो बोलें किआप बहुत मेहनती है और आसानी से दबाव में काम भी कर सकते है. और अगर आपको एक टीम में काम करना चाहते है तो बोले कि आप एक अच्छे टीम प्लेयर है और जानते है कि सबके साथ मिलकर कैसे काम किया जाता है.

(v) इनबाउंड और आउटबाउंड में क्या अंतर है ?

यह सवाल तभी पूछा जाएगा अगर आपने कॉलिंग प्रोफाइल उदाहरण के लिए कस्टमर केयर, कस्टमर सपोर्ट, या टेली-सेल्स के लिए अप्लाई किया है.

जवाब में सिर्फ यह बताएं कि इनबाउंड कॉलिंग में कॉलर को कॉल अटेंड करने होते है और आउटबाउंड में कॉलिंग में कॉलर को कस्टमर या लोगों को कॉल करना होता है.

(vi) अपनी मजबूतियों के बारे में बताएं ?

इसमें इंटरव्यूवर सिर्फ यह देखना चाहते है कि आप जॉब के लिए सही योग्य है या नहीं. जवाब में आप अपनी क्वालिटी के बारे में बोलें कि आप कितने कठिन परिश्रम है, आपकी कम्युनिकेशन स्किल कितनी अच्छी है, आप महत्वकांक्षी है और कंपनी के साथ अपना विकास चाहते है.

(vii) क्या आप कस्टमर से फोन के जरिये डील करने में कम्फर्टेबल हो ?

अगर आप एक फ्रेशर है तो बोले की आपने पहले कभी ये किया नहीं है लेकिन सही गाइडेंस और ट्रेनिंग के साथ आप आसानी से कस्टमर्स को हैंडल कर पायंगे. वहीं अगर आप अनुभवी है तो कुछ पुराने कामों के बारे में बताये और फिर एक मोक कॉल के लिए भी तैयार रहे.

(viii) क्या आप रात को काम करने में कम्फर्टेबल है ?

इस प्रश्न के जवाब में हमेशा हाँ बोले इसे रिक्रूटर सुनिश्चित हो जाएगा कि आप काम करने के लिए वाकई दिलचस्प है.

(ix) आपकी कंप्यूटर नॉलेज कितनी अच्छी है ?

इसके जवाब में आप अपनी कंप्यूटर क्वॉलिफिकेशन्स के बारे में बताएं अगर आपने कोई डिप्लोमा सर्टिफिकेट या शार्ट-टर्म कोर्स किया है. और अगर नहीं किया है तो बोले कि आपको बेसिक कंप्यूटर नॉलेज है और वह चाहे तो आपका प्रैक्टिकल टेस्ट ले सकते है.

(x) आप कितनी सैलरी की उम्मीद कर रहे है ?

अगर आप फ्रेशर है तो जवाब में बोले कि कंपनी पोलिसी और स्टैंडर्ड्स के अनुसार सैलरी की उम्मीद कर रहा हूँ. अगर आप अनुभवी है तो बोले कि आपकी पिछली सैलरी कितनी थी और उसमें कुछ परसेंट बढाकर दे दें.

नॉन-वोइस/चैट इंटरव्यू प्रोसेस की पूरी जानकारी

1) लिखित परीक्षा

ये टेस्ट आपकी क्रिएटिविटी, ग्रामर और राइटिंग स्किल्स को चेक करने के लिए लिया जाता है. रिक्रूटर आपको कोई भी टॉपिक देंगे और उसपे आपको एक लघु निबन्ध या पैराग्राफ लिखना होगा. ये टेस्ट इसीलिए भी लिया जाता है क्योंकि नॉन-वोइस या चैट प्रोसेस में राइटिंग स्किल्स ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है.

2) टाइपिंग स्पीड

ये टेस्ट कैंडिडेट्स की टाइपिंग स्पीड को चेक करने के लिए लिया जाता है. इस राउंड को क्लियर करना बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि आपका बहुत सारा काम कंप्यूटर पर ही निर्भर करेगा और अगर आप इस टेस्ट को क्वालीफाई नहीं कर पाएंगे तो आपको जॉब मिलने के चान्सेस ना के बराबर होंगे. इसीलिए इंटरव्यू देने जाने से पहले आप रोजाना 15 से 20 मिनट अलग से निकालकर कोई भी पैराग्राफ या 8 से 10 लाइन को 1 मिनट के अंदर टाइप करने की प्रैक्टिस करे.  

3) जनरल एप्टीट्युड टेस्ट

कॉल सेंटर/बीपीओ के लिए बहुत ही सरल तरीके से एप्टीट्युड टेस्ट लिया जाता है. इस टेस्ट के लिए कैंडिडेट्स को 30 मिनट का समय दिया जाता है. इस प्रोसेस में कैंडिडेट्स को उसकी जनरल एनालिटिकल एबिलिटी, अंग्रेजी में वोकाबुलरी और लोजिकल एबिलिटी के लिए टेस्ट किया जाता है. इंटरनेट पर प्रैक्टिस के लिए बहुत सारे प्रश्न और उसके उत्तर भी उपलब्ध है जिससे आप तैयारी कर सकते है. इस राउंड को क्लियर करने के लिए लगभग 60% स्कोर होना जरूरी होता है.

4) ह्युमन रिसोर्स (HR)

नॉन वोइस या चैट प्रोसेस के लिए जो भी फाइनल एह्चार या कहें तो ह्युमन रिसोर्स राउंड होता है उसके दो भाग होते है:

  • परिचय (हर बीपीओ जॉब के प्रश्न एक जैसे ही होते है.)
  • जस्ट ए मिनट (JAM) –जैम (JAM) का मतलब होता है जस्ट ए मिनट अर्थात कहें तो सिर्फ एक मिनट इसमें आपको रैंडम्ली कोई भी टॉपिक दे दिया जाता है और आपको उसपे एक मिनट के लिए बोलना होता है. इसमें आपके पास कुछ सोचने का टाइम नहीं होता है इसीलिए जो आपके दिमाग में आता जाये आपको बोलना होता है. इसे कंडक्ट करने का सिर्फ एक ही कारण होता है कि रिक्रूटर आपके विचार या बोलने का अंदाज देखना चाहते कि आप किस प्रकार से जवाब देते हुए बोलते है. यह पूछे जाने वाले कुछ टॉपिक:

भूमंडलीय ऊष्मीकरण, साहित्य, टाइम मैनेजमेंट, समाज में महिलाओं का रोल.

इंटरव्यू की तैयारी

क्या डॉक्यूमेंट चाहिए होते है 

  • 10वीं और 12वीं की मार्कशीट
  • ग्रेजुएशन की मार्कशीट (जिन्होंने पूरा कर दिया है उन्हीं के लिए)
  • पोस्ट ग्रेजुएशन की मार्कशीट या डिग्री (जिन्होंने पूरा कर दिया है उन्हीं के लिए)
  • वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि जिसमें आपका पता लिखा हुआ होना चाहिए.
  • आधार कार्ड
  • सरकारी दस्तावेज (पैन कार्ड) या पैन कार्ड की रसीद/एकनॉलेजमेंट नंबर
  • जहाँ-जहाँ काम किया है वहाँ की तिथियाँ और अनुभव प्रमाण पत्र.
  • अंतिम तीन महीनों की सैलरी की रसीद.
  • 9 पासपोर्ट साइज के फोटो (सफ़ेद बैकग्राउंड के साथ)
  • 2 पोस्टकार्ड साइज फोटो

ध्यान दें: असली दस्तावेजों के साथ 2 से 3 फोटो कॉपी भी साथ लेकर जाएँ.

कॉल सेंटर/बीपीओ के इंटरव्यू के कुछ जरूरी टिप्स

क्या करना चाहिए

कंपनी के बारे में अच्छे से पढ़कर जाएँ.

ये ज़रूरी है कि आप जिस कंपनी में इंटरव्यू देने जा रहे है उसके बारे में आपको थोड़ी जानकारी हो. इसके लिए आप कंपनी के वेबसाइट पर जाकर अबाउट अस (बारे में), सेवाएं, मिशन विजन इत्यादि जैसी चीजों के बारे में पढ़ सकते है.

जॉब डिस्क्रिपशन को अच्छे से पढ़ें.

जॉब के बारे में इंटरव्यू देने जाने से पहले अच्छे से पढ़ले कि जिस पोस्ट के लिए आपने अप्लाई किया है. कंपनी में उस रोल की ड्यूटी और रेस्पॉन्सिबिलिटीज़ क्या है. उसके बाद अच्छे से सोचे और समझे. आप उसे एफ्फिसेंटली कैसे पूरा करेंगे. अगर ज़रुरत पड़े तो पुरानी कंपनी के कुछ इन्सटेंसेस देकर अपनी बात इंटरव्यू लेने वाले को समझाए.

रिज्यूमे में लिखी गयी सारी जानकारी आपको पता भी होनी चाहिए.

बहुत बार ऐसा होता है कि कैंडिडेट्स को पता ही नहीं होता है कि उनके रिज्यूमे में क्या लिखा है और क्या नहीं. इस वजह से रिक्रूटर को लगता है कि वो ज़्यादा सीरियस नहीं है और उनके सिलेक्शन के चान्सेस कम हो जाते है तो इससे बचने के लिए अपना रिज्यूमे अच्छे से पढ़कर जाये.

आत्मविश्वास के साथ बने रहें.

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है की आप अनुभवी है या नहीं, आप पोस्ट-ग्रेजुएट है या नहीं. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कितने कॉंफिडेंट है. इंटरव्यू के समय ज़्यादा घबराये नहीं. और साथ ही अपने बारे में सारी जानकारी बिना घबराएं दें.

अच्छे ड्रेस के साथ तैयार होकर जाएँ.

आप ऑफिस या वर्कप्लेस में जैसे ड्रेस करते है उससे आपके प्रोफेशनल एटीट्युड के बारे में पता चलता है. इसलिए बिना ये सोचे कि आप एक कॉल सेंटर/बीपीओ में इंटरव्यू देने जा रहे है तो अच्छी ड्रेस पहनकर ही जाये. अपने कपड़ों को अच्छे से पहले से ही तैयार कर दें. साथ ही जूतों को भी पोलिश करके तैयार कर दें.

टाइम पर पहुँचें

इस बात का ख़ास धयान रखें कि इंटरव्यू से एक रात पहले आप लोकेशन चेक करले और निर्णय लेलें कि कैसे जायेंगे जिससे आप इंटरव्यू के टाइम से थोड़ी देर पहले ही पहुँच जाये.

अपनी कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान दें.

कॉल सेंटर/बीपीओ में मुख्य रूप से फोकस कैंडिडेट्स की कम्युनिकेशन स्किल्स पर दिया जाता है. तो इंटरव्यू की डेट से पहले कोशिश करें कि आप रोजाना के आधा घंटा या 15 मिनट निकालकर अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को इम्प्रूव करें. कॉल सेंटर/बीपीओ में ज्यादातर कस्टमर केयर या कस्टमर सर्विस की जॉब्स होती है जिसमे आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स ही काम आती है इसीलिए इस पर ख़ास ध्यान दिया जाता है.

अपनी टाइपिंग पर भी ध्यान दें.

कम्युनिकेशन स्किल्स के अलावा एक और बात जिस पर ख़ास ध्यान दिया जाता है और वह है आपकी राइटिंग स्किल्स और टाइपिंग स्पीड क्योंकि कस्टमर केयर और कस्टमर सर्विस के बाद जो दूसरा बहुत ही कॉमन प्रोसेस है वह है चैट प्रोसेस. इसमें आपको कस्टमर के समस्याओं या क्वेरीज को सुलझाना करना होता है उसके लिए ई-मेल लिखने होते है. और इसके लिए आपकी टाइपिंग स्पीड और राइटिंग स्किल्स का अच्छा होना बहुत ज़रूरी है.

क्या न करें

अपने और अपनी स्किल्स के बारे में झूठ न बताएं.

काफी बार ऐसा होता है कि लोग इंटरव्यूवर की नजरों में अच्छा बनने के लिए अपने और अपनी स्किल्स के बारे में बढ़ा-चढ़कर बोलते है. उनको लगता है इससे वो सेलेक्ट हो जायेंगे लेकिन ये सच नहीं होता क्योंकि अगर इंटरव्यूवर ने आपका टेस्ट ले लिया या कोई ऐसा रोल दे दिया जो आपको नहीं आता तब आपका झूठ पकड़ा जाएगा और शायद आपको कंपनी से भी बहार निकाल दिया जाए.

रिज्यूमे में गलत जानकारी न डालें.

कभी भी रिज्यूमे में कोई ऐसी जानकारी न लिखे जो सच न हो, जैसे अपनी कोई क्वालिटी या स्किल्स या अनुभव के बारे में. ऐसा इसलिए न करें क्योंकि अब कंपनी किसी भी कैंडिडेट को हायर करने से पहले 2 या 3 सोर्सेज से वेरिफिकेशन करती है. और अगर आप पकड़े गए तो हो सकता है कि जॉब न मिलने के साथ-साथ आपको ब्लैक-लिस्ट भी कर दिया जाए. इसलिए ये गलती कभी न करें.

पिछली कंपनी के बारे में कुछ नकारात्मक न बोलें.

बहुत सारे कैंडिडेट्स ये गलती करते है और पुरानी कंपनी के बारे में उल्टा सीधा बोलते है. ऐसा करने से उनको लगता है कि रिक्रूटर उनको हायर कर लेगा जबकि होता इससे एकदम उल्टा है. कंपनियां ऐसे कर्मचारी नहीं चाहती है जो कंपनी की रेस्पेक्ट न करें और मौका मिलते ही कंपनी के लिए बुरा और उल्टा-सीधा बोलने लग जाये.

ज्यादा सैलरी के बारे में बात न करें.

याद रखे कि जब आप इंटरव्यू देने जाएँ तो सिर्फ सैलरी के बारे में ही बात न करें. इससे इंटरव्यूवर पर यह प्रभाव पड़ेगा कि आपको कंपनी या जॉब से ज़्यादा इंटरेस्ट पैसों में है और सिर्फ इसीलिए आप काम करना चाहते है.

जन्म से ही क्रिकेट का दीवाना हूँ लेकिन क्रिकेटर बन नहीं सका और अब विकिपीडियन बनकर खिलाड़ियों पर लिखना शौक बना दिया है।

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